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MSS-MS-00178
बाइबल के प्राथमिक सत्य / FUNDAMENTAL BIBLICAL TRUTHS (HINDI) By Zac Poonen
Language: Hindi
Published By Masihi Sahitya Sanstha
बाइबल के प्राथमिक सत्य
परमेश्वर ने एक महान् उद्देश्य को पूरा करने के लिए मनुष्य की रचना की है। उसी श्रेणी में उसने अदन की वाटिका में आदम और हव्वा को अपने हाथों से बनाया। आदम और हव्वा ने वर्जित फल को खाकर परमेश्वर के विरुद्ध पाप किया। आदम की आत्मा के भीतर परमेश्वर की आवाज़ यह कह रही थी कि उसे उस पेड़ के फल को नहीं खाना चाहिए, लेकिन उसने उस आवाज़ को नहीं सुना और पाप कर बैठा।
कोई भी मनुष्य तब तक पवित्र नहीं हो सकता जब तक कि वह यह फैसला न करे कि मैं परमेश्वर द्वारा सृजी किसी भी वस्तु से बढ़कर अपने सृजनहार परमेश्वर को चुनूँगा। आप जानते हैं कि परमेश्वर द्वारा बुलाए जाने के बाद, अब्राहम जैसे व्यक्ति को भी पचास वर्ष उपरान्त ऐसा एक चुनाव करना पड़ा था। जब परमेश्वर ने उसे पहले बुलाया था, तब उसकी आयु पचहत्तर वर्ष की थी और वह कसदियों के ऊर नगर में स्थित अपने घर में बहुत आराम से रह रहा था। परमेश्वर ने उसे यह कहते हुए बुलाया कि तू उस नगर की सुख-सुविधा, सुरक्षा और आनन्द को छोड़ दे जिसमें तू पला-बढ़ा है। प्रभु के पीछे चलने के लिए उसे अपना घर, ज़मीन और सब कुछ त्यागना पड़ा था।
अगर आदम ने अपनी अन्तर-आत्मा के अनुसार परमेश्वर को सुना होता, तो क्या उसका कुछ नुक़सान हुआ होता? जवान लोग अपनी उम्र में बढ़ते हैं, तो वे इसी प्रकार की गलतियाँ अपने चुनाव में करते हैं। वह अच्छी नौकरी, एक अच्छा घर और एक सुन्दर जीवन-साथी चाहते हैं। यही वे मुख्य वस्तुएँ हैं जो सभी जवान लोग चाहते हैं। आदम के बारे में सोचें। क्या परमेश्वर ने आदम के लिए इन तीनों बातों को पूरा किया था? निश्चय ही किया था! लेकिन फिर भी वह पाप में सम्मलित हो गया। परमेश्वर एक भला परमेश्वर है! परमेश्वर आज भी वैसा ही है, और अगर हम उस पर भरोसा करें तो वह आज भी अपने बच्चों के लिए इसी तरह प्रबन्ध करता है, और उनके लिए सर्वश्रेष्ठ वस्तुएँ उपलब्ध कराता है_ केवल हमें आज्ञाकारी रहना है। मैं पिछले अट्ठावन वर्षों से यह देख रहा हूँ। परमेश्वर की संतान होना इसलिए एक अद्भुत बात है क्योंकि परमेश्वर हमारी हरेक आत्मिक, दैहिक और भौतिक ज़रूरतों के लिए प्रबन्ध करता है। मैं आशा करता हूँ यह पुस्तक आपके जीवन के लिए लाभकारी होगी और आप परमेश्वर की अन्तर-आत्मा की आवाज को सुनकर अपने जीवन में परमेश्वर को प्रथम स्थान देना सीखेंगे।
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